'महर्षि' शब्द में कौन सी संधि है?
व्याख्या: महा + ऋषि = महर्षि। यहाँ 'आ' और 'ऋ' मिलकर 'अर्' हो गए हैं, जो गुण संधि का लक्षण है।
'सज्जन' का सही संधि विच्छेद क्या है?
व्याख्या: यह व्यंजन संधि का उदाहरण है। 'त्' के बाद 'ज' आने पर 'त्', 'ज्' में बदल जाता है।
'पवन' का संधि विच्छेद होगा:
व्याख्या: यह अयादि संधि है। 'ओ' का 'अव्' हो जाता है (पो + अन = पवन)। (नोट: पौ + अन = पावन होता है)।
'निराशा' शब्द में संधि है:
व्याख्या: निः + आशा = निराशा। विसर्ग (:) का 'र्' में परिवर्तन हुआ है।
'विद्यालय' में कौन सी संधि है?
व्याख्या: विद्या + आलय = विद्यालय (आ + आ = आ)।
'जगदीश' का संधि विच्छेद है:
व्याख्या: 'त्' (वर्ग का पहला वर्ण) के बाद स्वर आने पर 'त्' अपने वर्ग के तीसरे वर्ण 'द्' में बदल जाता है।
'राजपुत्र' में कौन सा समास है?
व्याख्या: राजा का पुत्र। यहाँ संबंध कारक की विभक्ति 'का' का लोप है।
'पंचवटी' में कौन सा समास है?
व्याख्या: पहला पद संख्यावाचक (पंच = पांच) है और यह समूह (वटों का समूह) का बोध कराता है।
'यथाशक्ति' में कौन सा समास है?
व्याख्या: पहला पद 'यथा' अव्यय है और प्रधान है। अर्थ: शक्ति के अनुसार।
'लम्बोदर' में कौन सा समास है?
व्याख्या: लम्बा है उदर जिसका = गणेश। जब पद मिलकर किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करें, तो बहुव्रीहि समास होता है।
'नीलकमल' शब्द में समास है:
व्याख्या: नीला है जो कमल। यहाँ विशेषण-विशेष्य (नील-कमल) का संबंध है।
'माता-पिता' में कौन सा समास है?
व्याख्या: माता और पिता। जहाँ दोनों पद प्रधान हों और 'और' का लोप हो, वहां द्वंद्व समास होता है।
'अश्व' का पर्यायवाची शब्द नहीं है:
व्याख्या: 'कटक' का अर्थ 'सेना' होता है। घोटक, हय, बाजी, तुरंग अश्व (घोड़ा) के पर्यायवाची हैं।
'कमल' का पर्यायवाची है:
व्याख्या: नीर (जल) + ज (जन्म लेने वाला) = कमल। 'जलद' बादल का है, 'पीयूष' अमृत का, और 'दिनकर' सूर्य का।
'आकाश' का पर्यायवाची शब्द नहीं है:
व्याख्या: 'अवनि' का अर्थ 'पृथ्वी' या 'धरती' होता है।
'शशांक' किसका पर्यायवाची है?
व्याख्या: शशांक, मयंक, विधु, राकेश, सुधांशु - ये सभी चंद्रमा के पर्यायवाची हैं।
'यमुना' का पर्यायवाची है:
व्याख्या: कालिंदी यमुना का नाम है। भागीरथी, मंदाकिनी और सुरसरि गंगा के पर्यायवाची हैं।
'आँख' का पर्यायवाची नहीं है:
व्याख्या: अतुल का अर्थ है जिसकी तुलना न हो सके। चक्षु, लोचन, दृग, नयन, नेत्र आँख के पर्यायवाची हैं।
'जंगम' का विलोम शब्द है:
व्याख्या: जंगम का अर्थ है 'चलने वाला' और स्थावर का अर्थ है 'स्थिर'।
'अथ' का विलोम क्या होगा?
व्याख्या: अथ (आरम्भ) का विलोम इति (समाप्ति) होता है।
'उर्वर' का विलोम शब्द है:
व्याख्या: उर्वर (उपजाऊ) का विलोम ऊसर (बंजर) होता है।
'शोषक' का विलोम है:
व्याख्या: शोषक (शोषण करने वाला) का उल्टा पोषक (पोषण करने वाला) है।
'आविर्भाव' का सही विलोम शब्द है:
व्याख्या: आविर्भाव (प्रकट होना) का विलोम तिरोभाव (गायब/लुप्त होना) होता है।
'संकीर्ण' का विलोम है:
व्याख्या: संकीर्ण (संकरा) का विलोम विस्तीर्ण (फैला हुआ) होता है।
'अक्ल का दुश्मन' मुहावरे का अर्थ है:
व्याख्या: जो व्यक्ति अक्ल (बुद्धि) का उपयोग न करे, उसे अक्ल का दुश्मन कहते हैं।
'गागर में सागर भरना' का अर्थ है:
व्याख्या: बिहारी लाल के दोहों के लिए यह उक्ति प्रसिद्ध है।
'लोहे के चने चबाना' मुहावरे का अर्थ है:
व्याख्या: अत्यधिक कठिनाई का सामना करना।
'नौ दो ग्यारह होना' का अर्थ है:
व्याख्या: पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गए।
'अधजल गगरी छलकत जाय' लोकोक्ति का अर्थ है:
व्याख्या: जिसके पास कम ज्ञान या धन होता है, वह उसका दिखावा अधिक करता है।
'सिर हथेली पर रखना' का अर्थ है:
व्याख्या: जान की परवाह न करना।
जिसके आने की कोई तिथि न हो:
व्याख्या: 'अ' (नहीं) + 'तिथि' (तारीख) = अतिथि।
जो ईश्वर में विश्वास रखता हो:
व्याख्या: विश्वास रखने वाला 'आस्तिक' और न रखने वाला 'नास्तिक' कहलाता है।
जंगल में लगने वाली आग:
व्याख्या: दावाग्नि (जंगल की आग), बड़वानल (समुद्र की आग), जठराग्नि (पेट की आग)।
जो कम बोलता हो:
व्याख्या: वाचाल (बहुत बोलने वाला), मितभाषी (कम बोलने वाला)।
जिसके समान दूसरा न हो:
व्याख्या: जिसके जैसा द्वितीय (दूसरा) न हो।
'आग' का तत्सम रूप है:
व्याख्या: 'आग' तद्भव है और 'अग्नि' तत्सम (संस्कृत मूल)।
निम्न में से 'तद्भव' शब्द कौन सा है?
व्याख्या: माथा तद्भव है, इसका तत्सम 'मस्तक' होता है। बाकी सभी (मयूर, कूप, ग्राम) तत्सम हैं।
'कर्पूर' का तद्भव रूप है:
व्याख्या: कर्पूर (संस्कृत) -> कपूर (हिंदी/तद्भव)।
'साखी' का मूल तत्सम शब्द क्या है?
व्याख्या: कबीर की 'साखियां' प्रसिद्ध हैं, जो 'साक्षी' (गवाह/सबूत) शब्द से बना है।
'गोधूम' का तद्भव है:
व्याख्या: गोधूम एक तत्सम शब्द है जिसका हिंदी रूप 'गेहूँ' है।
शुद्ध वर्तनी वाला शब्द चुनिए:
व्याख्या: 'श' पर बड़ी ई की मात्रा और 'व' के ऊपर रेफ (र्) आता है।
कौन सा शब्द शुद्ध है?
व्याख्या: उत् + ज्वल = उज्ज्वल। इसमें दो आधे 'ज' (ज्ज्) होते हैं।
अशुद्ध वाक्य छांटिए:
व्याख्या: 'अनेक' स्वयं बहुवचन है, इसका 'अनेकों' नहीं होता। सही वाक्य: 'अनेक लोगों ने यह देखा।'
शुद्ध शब्द है:
व्याख्या: 'श्र' में 'र' नहीं होता, केवल 'ऋ' की मात्रा होती है (शृ)। मानक हिंदी वर्तनी में विकल्प C सही है।
सही वाक्य का चयन करें:
व्याख्या: D गलत है क्योंकि मृत्युदंड स्वयं एक सजा है ('की सजा' लिखना अनावश्यक है)। A गलत है क्योंकि दंड 'दिया' नहीं जाता, व्यक्ति उसका 'पात्र' होता है।
हिंदी किस लिपि में लिखी जाती है?
व्याख्या: हिंदी की मानक लिपि देवनागरी है (अनुच्छेद 343)।
'क, ख, ग, ज, फ' ध्वनियाँ किसकी हैं?
व्याख्या: जिन वर्णों के नीचे नुक्ता (.) लगा होता है, वे अरबी-फारसी प्रभाव से हिंदी में आए हैं।
संविधान के किस अनुच्छेद में हिंदी को राजभाषा माना गया है?
व्याख्या: अनुच्छेद 343(1) के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी।
वर्णमाला में संयुक्त स्वर कौन से हैं?
व्याख्या: ये दो अलग-अलग स्वरों के मेल से बनते हैं, इसलिए संयुक्त स्वर कहलाते हैं।
'कनक कनक ते सौ गुनी' में कौन सा अलंकार है?
व्याख्या: जब एक शब्द एक से अधिक बार आए और अर्थ अलग-अलग हों (कनक=सोना, कनक=धतूरा), तो यमक अलंकार होता है।